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शुक्रवार, 7 जुलाई 2023

मोदी जी को एक खुली पाती ट्रेन में सफर करने वाले आम जन के तरफ से

मोदी जी प्रणाम,
आपके फोटो को हमने पान के दुकान पर देखा, बहुत अच्छा लगा। हम एक आम जन है रोज के 400-500 कमाने वाला। आशा है आप हमारे चिट्ठी को जरूर पढ़ेंगे।
वैसे बहुत लोग बहुत कुछ लिखता है, मगर हमारा क्या पूरे देश का सोचना है कि मोदी जी आम जन की सुनते है।
मोदी जी, असल में हम बिहारी मजदूर है, जो कमाने के लिए कभी इस जगह कभी उस जगह घूमते रहता है, भटकते रहता है। लोगों से सुना कि आप बड़ा एडवांस वाला ट्रेन का उद्घाटन किये है जिसका नाम वंदे भारत है, फ़ोटो भी बहुत चकाचक थी उसकी अखबार में और साथ में आपकी भी।
इधर कुछ महीने से अखबार में रोज आपका फ़ोटो ट्रेन के साथ देखकर मन खुश हो जा रहा था, क्योंकि देश जो हमारा है वो बहुत विकास कर रहा है।
वैसे मोदी जी, एक सवाल पूछना था कितना और ई नया वाला ट्रेन का उद्घाटन कीजियेगा? ई सरकारी बाबू सब आपको बेरोजगार समझ लिया है जो जब देखो एक ट्रेन के उद्घाटन में घसीट लेता है, अपने सरकारी अफसर को थोड़ा समझाइए क्योंकि अब खबर पुरानी टाइप लगती है।
खैर हमें क्या देश का विकास भी जरूरी है।
खैर इसी विकास के बीच एक दिन हमें घर की बहुत याद आई, रात भर हम सोए नहीं थे मोदी जी। तब फिर क्या था, हम पहुंच गए स्टेशन पर और दलाल को पैसा दिए और स्लीपर का वेटिंग टिकट ले लिए। हम सोचे हमरी सरकार इतना कुछ vip ट्रेन चलवा रही तो हमरे लिए भी आप जरूर कुछ न कुछ किये होंगे, क्योंकि आप भी तो वो गरीबी का दिन देखे हुए है।
अगले दिन पहुंच गए हम स्टेशन पर, वहां देखे वंदे भारत ट्रेन लगी हुई थी और उसमें से हाफ पैंट वाले साहेब और उनकी मिसेज लोग निकल रही थी, साफ विदेश माफिक। हम भी बेवकूफ उसी बीच में आ गए, तो डर गए। फिर कहे न ई तो मोदी जी वाला ट्रेन है, एक दम चकाचक।
फिर हम एक जगह बैठ गए कि अपनी भी ट्रेन आएगी और हम घर जाएंगे।
हमें लगा अब तो विकास हो गया है तो हमें भी शानदार सुविधा मिलेगी इसी ख्याल में नींद आ गयी। थोड़ी देर बाद अनाउंसमेंट हुआ कि ट्रेन 30 मिनट लेट है, तो वो हम मोबाइल उठा के चेक किये की ई ट्रेन कहाँ पहुंची तो मालूम चला ट्रेन तो स्टेशन से निकल गयी। तो हम धड़-फड़ा के उठे अगल बगल में मालूम किये तो बताया लोग की मोबाइल में गलत भी बता देता है सब।
खैर ट्रेन आया तो देखे क्या पहले हमारे ट्रेन में 10-12 ठो स्लीपर डब्बा था, अब 6-7 ठो हो गया है, मगर सीसा वाला चक-चक डब्बा का संख्या बढ़ गया है। बड़ा शानदार डब्बा बनवाए है आप। अब किसी तरह धक्का मुक्की कर के हम स्लीपर में चढ़ गए। चढ़ते देखते का है हमरे पड़ोस का सुरेश वो नाक बंद करके बाथरूम के पास बैठा हुआ था। उससे हाल पूछा तो बोला कहो कि मोदी जी है न तो ये भी सीट न मिलता। वैसे भी हम गरीब-गुरबा के लिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं, अब ई तो हमारी फूटी किस्मत है जो सीट कंफर्म न मिली। हम जैसे तैसे चला लेंगे काम। लेकिन मोदी जी उ vip ट्रेन सच में बड़ा शानदार लगा देख के, उसमें तो पैसेंजर को पूरा सीट आपके अधिकारी देते होंगे। हम भी सोचे है, जब बहुत कमा लेंगे तो हम भी उस ट्रेन का सफर करेंगे।
तब तक थोड़े देर में टीटीई बाबू आ गए काला कोट पहन के, हम कोशिश किये मालूम करने का तो टीटीई बाबू उधर चकाचक डब्बे के तरफ बुला लिए, और कुछ पैसा लेकर सीट के लिए फिक्स कर दिए।
अब हम भी फुल के कुप्पा हो लिए और चल दिये महाराजा की तरह अपने सीट की तरफ। दिन में अभी सो ही रहे थे, तो कोई मेरा पैंट खींच के बोला ई सीट खाली करो उसका टिकट है। आस-पास के लोगों ने भी देखा तो बोला उसी का टिकट है।
अब फिर रुआंसे मुंह उस वंदे भारत ट्रेन की याद में हम जमीन पर आ गए, सोचे कोई न विकास के लिए ये भी सही है, वैसे भी मोदी जी हम लोग को बहुत मानते है, गरीबी में पलकर बड़ा हुए है न। 
थोड़े देर बाद टीटीई को खोजना चालू किया तो मालूम चला साहेब किसी स्टेशन पर बीच में ही उतर गए है। हम तो ठहरे अभागा, किस्मत ही फूटी थी। पैसे भी हाथ से निकल गए। फिर थोड़े देर बाद भूख लगी तो ट्रेन में खाना बाँटने वाले को ही खाना आर्डर कर दिए, सोचे जो भी बैठने को मिला है वो भी जगह न मिलता, तो बाहर न गए।
रात में खाना भी आ गया, एक दम गरमा-गरम। चूंकि भीड़ था तो सोचे 10 मिनट बाद खा लेंगे। 10 मिनट बाद डब्बा खोला तो उसमें पूरी, सब्जी, अचार दिखा। देखकर मन गद-गद हो गया। जब खाने गया तो मोदी जी क्या बोले, हम तो फूटी किस्मत ही लेकर आए थे, पूरी तो तोड़ने से नहीं तोड़ी जा रही थी। हम तो सोच में पड़ गए भगवान न करे उ VIP ट्रेन में बैठे सुकोमल लोग को ई सब खाना पड़े, न तो क्या सोचेंगे कि मोदी जी तो झूठ बोलते है कि बहुत बढ़िया सुविधा मिलेगी। और हम तो ठहरे मजदूर कैसी भी पूरी तोड़ कर खा लेंगे। खैर घर जाने की खुशी ही ऐसी चीज है मोदी जी आदमी अपनी फूटी किस्मत को भूल जाता है।
वैसे भी मेरा तो सौभाग्य था कि वंदे भारत ट्रेन दिख गयी। हम भी अपने मोबाइल में उसका फ़ोटो अपनी अम्मा के लिए खिंच कर ले जा रहे।
खैर मोदी जी, घबराइयेगा नहीं, विकास करते रहिएगा, हम मजदूर तो इस धरती पर फूटी किस्मत ही लेकर आये है पहले कोरोना में पैदल कुछ सौ किलोमीटर चले थे और अब यह ट्रेन। असल में क्या करे मोदी जी, हम मजदूर लोग उतना न कमाते न जो टैक्स-ऑक्स दे पाए। हमारे लिए तो यही ट्रेन ठीक है।
मगर मोदी जी आपसे एक विनती है, कम से कम थोड़ा सा एक टका ही सही विकास का एक टुकड़ा तो चखा दीजिए। और मोदी जी अगले सफर में अधिकारी लोग को बोल दीजिएगा अब इससे कम डब्बा न करने को, क्योंकि इतने में ही दम घुटता है। और ट्रेन में सिर्फ मर्द लोग थोड़े न रहते औरत और बच्चा सब भी पिसा जाता है। और आपको बच्चे तो बहुत प्यारे लगते है न, तो उनकी ही खातिर सही, थोड़ा अधिकारी लोग को समझा दीजिएगा की ट्रेन में डब्बा और कम न करे।
आप इसी तरह विकास करते रहे।

आपका विश्वासी

एक आम मजदूर नागरिक।

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

अब चम्पारण में भी स्वर्णप्राशन की शुरूआत


25 फरवरी 2021, बेतिया। आयुर्वेद में किसी व्यक्ति के जीवन में 16 संस्कारों का विवरण मिलता है। जिसमें से एक जातकर्म संस्कार है। इसी के अंतर्गत एक संस्कार स्वर्णप्राशन या सुवर्णप्राशन संस्कार भी है जिसमें शिशु को स्वर्ण अर्थात सोना का सेवन कराया जाता है जिसका कश्यप संहिता में विस्तृत विवरण है। इसमें शहद, A2 घी में स्वर्ण भस्म का मिश्रण अनेक औषधीय पौधे का प्रयोग किया जाता है जो बच्चों को चटाया जाता है। इस संस्कार के लगातार प्रयोग के परिणाम स्वरूप शिशु के मानसिक शक्ति,शारीरिक शक्ति, रोगप्रतिरोधक शक्ति का विकास होता है। 
इसके सेवन के परिणाम स्वरूप बच्चों का वायरल बुखार, चिड़चिड़ापन, भूख नहीं लगना जैसे विकारों का भी बचाव होता है। आयुर्वेद के अनुसार स्वर्ण संबंधी औषधि का महत्व सबसे ज्यादा पुष्य नक्षत्र में होता है जिसका सबसे ज्यादा लाभ मिलता है। प्राचीन समय में प्रत्येक बच्चों का स्वर्णप्राशन कराया जाता था, मगर आधुनिकता के चक्कर में हम अपने इस तरह के संस्कारों को भूलते जा रहे जो बच्चों को स्वस्थ रखता था। 
यह स्वर्णप्राशन बेतिया में राजगुरु चौक के समीप अवस्थित श्री श्री आयुर्वेदिक केंद्र द्वारा संस्कृति आर्य गुरुकुल, राजकोट के सहयोग से बेतिया में निःशुल्क आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत 2 माह से 15 साल तक के 60 बच्चों ने स्वर्णप्राशन का लाभ उठाया। इस स्वर्णप्राशन शिविर की शुरुआत शहर के आर्य समाज के प्रधान रुद्रदेव आर्य जी एवं कृष्णमोहन जी हिन्दू ने किया। यह शिविर प्रातः 10 बजे से रात्री 8 बजे तक अनवरत चलता रहा जिसमें अभिभावक लगातार अपने बच्चों को ला रहे थे। यह शिविर प्रत्येक माह पुष्य नक्षत्र में बेतिया में निःशुल्क आयोजित होते रहेगा जिसके बारे में विस्तृत जानकारी 8935806554 पर सम्पर्क कर ली जा सकती है। अभिभावकों के अनुसार कोरोना के लॉकडाउन से लोगों का आयुर्वेद में विश्वास बढ़ा है तो जरूरी है स्वर्णप्राशन जैसी पुरानी आयुर्वेदिक परम्पराओं को पुनर्जीवित कर लोगों के बीच रखा जाए जिससे कोई भी व्यक्ति उसका लाभ आसानी से उठा सके। आर्य समाज के प्रधान रुद्रदेव जी ने कहा ऐसे शिविर का आयोजन अनवरत चलते रहना चाहिए जिससे कि प्रत्येक बच्चे उससे स्वास्थ्य लाभ उठा सके। कृष्णमोहन जी के अनुसार स्वर्णप्राशन आज के बच्चों की जरूरत ही है क्योंकि आज के भाग-दौड़ भरी जिंदगी में बच्चों में बहुत सारे विकार आते जा रहे और स्वर्णप्राशन इन विकारों को दूर करने में सहायक है। इस मौके पर शिविर के आयोजक अविनाश कुमार ने अभिभावकों को बताया कि जिस प्रकार अंग्रेजी चिकित्सा पद्धति में टीका होता है उसी प्रकार हम स्वर्णप्राशन को आयुर्वेद का टीका बोल सकते है जिससे बच्चों का कई बीमारियों से बचाव होता है, तथा अभिभावकों को आश्वस्त किया कि यह शिविर लगातार उनके आयुर्वेदिक केंद्र पर निःशुल्क चलते रहेगी जिससे अधिक से अधिक से अधिक बच्चे स्वास्थ्य लाभ कर सके। साथ में यह भी बताया कि स्वर्णप्राशन बच्चों को 15 साल तक लगातार दिया जा सकता है जो बच्चों के पूर्ण विकास में बहुत बड़ा सहायक हो सकता है। अगले माह पुष्य नक्षत्र 24 मार्च को आएगा जिसमें पुनः बच्चों को स्वर्णप्राशन दिया जाएगा और उसके आगे की तिथि सोशल मीडिया जैसे माध्यम से दी जाती रहेगी और साथ में आग्रह किया कि अभिभावक अपने बच्चों को इस स्वर्णप्राशन शिविर में जरूर ले कर आये और अपने बच्चों को आयुर्वेद के इस आशीर्वाद का लाभ दे।

रविवार, 11 अक्टूबर 2020

डायरेक्ट मार्केटिंग कंपनी और कम दामों में बिकते उनके समान का रहस्य

डायरेक्ट मार्केटिंग ने बाजार का एक नया आयाम तो खोला ही जो क्वालिटी या अलग अलग केटेगरी वाले उत्पाद को सीधे ग्राहक तक पहुंचाता नजर आता है। एक तरफ ग्राहक दुकानदार के हाई मार्जिन वाले प्रोडक्ट के कारण परेशान थे, जिसमें दुकानदार को तो कंपनियां हाई मार्जिन देती नजर आती है, मगर ग्राहक को मिलता था एक कम क्वालिटी का सामान जो ग्राहक की अपेक्षा पर कभी खरा नहीं उतरता था। धीरे-धीरे Forever, Amway, ModiCare, Vestige, IMC, RCM जैसे कंपनियों ने बाजार में पैर पसारना शुरू किया, जिन्होंने अलग अलग वित्तीय स्थिति वाले ग्राहक को अपना ग्राहक बनाना चालू किया। धीरे-धीरे स्थिति यहां तक आनी चालू हो गयी, जहां कोरोना में बाजार एक बहुत बड़े घाटे में आ गयी, वहीं ये कंपनियां ग्राहकों तक सीधे पहुंच के कारण फायदे में नजर आने लगी।
इस बीच एक नया ट्रेंड इन कंपनियों से जुड़े लोगों द्वारा नजर आने लगे, जो डायरेक्ट मार्केटिंग के नियमों का साफ उल्लंघन है। अधिक से अधिक फायदे के लिए इनसे जुड़े ऊपरी स्तर के लोग अपनी कमाई बढ़ाने के लिए गलत हथकंडे अपनाने लगे। परिणाम स्वरुप कई प्रोफेशनल जो इसमें कार्य करना भी चाहते थे वो भी पीछे हटने लगते है। कई उच्च स्तर पर कार्यरत्त लोग अपने फायदे के लिए इन कंपनियों के सामान को अति कम दामों पर बाजार में दुकानदारों को बेचना चालू कर दिए। उन्होंने बाजार को कभी न बताया आखिर वो किस कारण से इन सामान को कम दामों पर बाजार में बेच रहे। परिणाम स्वरुप मेहनत तो किसी और का होता लेकिन मजा कोई और लेने चला जाता।
यदि इस कम दाम के जड़ में हम जाए तो पाएंगे कि एक बहुत बड़ा खेल इन कंपनियों के एसोसिएट द्वारा बाजार में चलाया जा रहा। एक तरफ बाजार की बड़ी कंपनियां तो नकली सामान या रेट को लेकर हमेशा जागरूक रहती है जिससे कि बाजार में उनके प्रोडक्ट को लेकर ग्राहक के बीच गलत भावना न फैल पाए, वहीं डायरेक्ट मार्केटिंग की कंपनियां जैसे IMC, Vestige, Amway जैसे कंपनियां अपने एसोसिएट के बारे में किसी प्रकार का वेरिफिकेशन नहीं करती न कोई मार्केट सर्वे करते है कि कोई गलत तरीका बाजार में फायदे कमाने के लिए तो नहीं उठाया जा रहा। कहीं कम दामों में असली के जगह नकली प्रोडक्ट तो नही बेच रहा? आइये जाने इन सब के पीछे की असलियत, आखिर डायरेक्ट मार्केटिंग में समान सिर्फ अपने ID से ही क्यों ले, किसी अन्य जगह या माध्यम से क्यों न ले:
1. जब आप खुद की ID से कोई सामान लेते हो तो नकली समान की गुंजाइश खत्म हो जाती। क्योंकि कंपनी प्रत्येक आउटलेट और डिस्ट्रीब्यूटर पॉइंट के स्टॉक का मेंटेनेंस अपने ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से करती है और उसका बिल आपको दिया जाता है।
2. ऐसे बहुत सारे स्कीम इन कंपनियों द्वारा समय समय से लाया जाता है, जो आपको नहीं दिखाया जाता, ऊपर के एसोसिएट हो सकता है आपसे स्कीम छुपा रहे हो, जैसे Vestige का कंसिस्टेंसी आफर, तो IMC का प्यूरिफायर ऑफर या किसी कंपनी का विदेश प्रवास के आफर।
3. इसके अलावे कंपनी अपने एसोसिएट को अन्य खर्च के लिए अलाउंस, लोन इत्यादि भी बड़े स्तर पर देती है कई बार तो मोटरसाइकिल वगैरह भी दिया जाता है, ऐसे सारे मौके आपके हाथ से इन एसोसिएट के द्वारा आपसे छीना जा रहा।
4. कई बार देश-विदेश भ्रमण का भी मौका इन कंपनियों द्वारा दिया जाता है जिसका न्यूनतम खर्च 20000 प्रति व्यक्ति से चालू होकर लाखों तक में जाता।
5. इसके अलावा कई इंसेंटिव है जो आपके एकाउंट में सीधे तौर पर आपकी कमाई के रूप में आता है।
तो एक बार डायरेक्ट मार्केटिंग के समान को कम दाम में लेने से पहले दस बार सोचे कि आपके पॉकेट को कैसे कुछ एसोसिएट द्वारा चपत लगाई जा रही। मेहनत तो आप करते हो उनके समान को बेचने में लेकिन मलाई वो खा रहे। तो एक बार रेट के चक्कर में न पड़ खुद से इस बिजनस में जुड़े जिससे कोई भी आपको न तो नकली समान दे पाएगा न ही ही आपके हिस्से के स्कीम, भ्रमण, कमाई को छीन पाएगा। तो सीधे तौर पर जुड़े। किसी फर्जी एसोसिएट के चक्कर में न पड़े जो आपको लालच देता हो कि ये समान इतने में दे देगा या उतने में। अपनी मेहनत का फायदा खुद उठाये।